शनिवार, 3 अगस्त 2013
शुक्रवार, 21 सितंबर 2012
रविवार, 16 सितंबर 2012
भारत खोल
भारत बंद करनेवालों पर
जमकर हल्ला बोलेंगे ,
खोलने देश की किस्मत
पूरा भारत खोलेंगे।।
खोलेंगे सत्ता के गलियारों के
परदे मोटे मोटे,
खोलेंगे लाल फीतों में बंद
सपने छोटे छोटे .
खोलेंगे सच
रक्तरंजित हाथों का,
खोलेंगे राज
विदेशी बैंक के खातों का .
जुबान पर लगे ताले खोलेंगे
मन के दरवाजे खोलेंगे
खोलेंगे राहें
मंजिल तक जाने को,
खोलेंगे दिल
दिल से मिलाने को,
अबकी बार
बात कुछ नयी बोलेंगे,
बंद पड़ा है पूरा का पूरा
आओ मिलकर भारत खोलेंगे।।
शनिवार, 15 सितंबर 2012
शुक्रवार, 7 सितंबर 2012
ऐसा क्यों माँ ?
अस्पताल में बेड पर लेटे
छुटकू ने बहुत सोचा
फिर अपनी माँ का आँचल खिंचा
बोला ऐसा क्यूँ माँ ?
स्कुल की दीदी कहती है,
करोडो रूपये लगाकर बने कारखाने
नदी को गन्दा करते है .
सरकार फिर करोडो रूपये लगाकर
उसे साफ़ करवाती है।
फिर भी डाक्टर दीदी कहती है
हमारे पानी में करोडो कीटाणु है,
हर साल इससे करोडो लोग बीमार होते है।
माँ कल अस्पताल में मंत्रीजी आये थे,
वो प्लास्टिक की बोतल का पानी
पि रहे थे।
पर मुझे प्लास्टिक की बोतल का पानी
सुई से चढ़ाया।
ऐसा क्यों माँ ?
सदस्यता लें
संदेश (Atom)